रायपुर। छत्तीसगढ़ की राज्य सरकार अपनी बहुचर्चित महतारी वंदन योजना के दायरे को और व्यापक बनाने की दिशा में गंभीरता से विचार कर रही है। योजना के जरिए राज्य की पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है, और अब कोशिश यह है कि जो योग्य महिलाएं अब तक किसी वजह से इसका फायदा नहीं उठा पाई हैं, उन्हें भी इस दायरे में लाया जाए। इसके लिए सरकार पोर्टल को दोबारा खोलने पर मंथन कर रही है, ताकि छूटी हुई पात्र महिलाएं नए सिरे से आवेदन कर सकें।
महतारी वंदन योजना का दायरा बढ़ाने पर विचार
सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार की योजना केवल पोर्टल दोबारा खोलने तक सीमित नहीं है। इसके साथ-साथ यह भी विचार किया जा रहा है कि योजना के दायरे में तीन नए वर्गों को शामिल किया जाए—दिव्यांग महिलाएं, कुछ विशेष श्रेणी की अविवाहित युवतियां, और ट्रांसजेंडर महिलाएं। यानी अभी तक जो योजना मुख्यतः विवाहित महिलाओं पर केंद्रित रही है, उसका सामाजिक दायरा अब और व्यापक हो सकता है। महतारी वंदन योजना का आधिकारिक पोर्टल

हालांकि इन नए वर्गों को शामिल करने की प्रक्रिया इतनी सरल नहीं होगी। सरकार पहले यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इन नई श्रेणियों के लिए स्पष्ट और ठोस पात्रता मानदंड तय हों, ताकि योजना का लाभ वास्तव में जरूरतमंद और योग्य महिलाओं तक ही पहुंचे। इसके तहत आयु सीमा, पात्रता की शर्तें और अन्य आवश्यक बिंदुओं को पहले से परिभाषित करने की योजना है।
अविवाहित युवतियों के लिए तय होगी सीमा
योजना के विस्तार से जुड़ा एक अहम पहलू यह है कि किन अविवाहित युवतियों को पात्र माना जाएगा, इसे लेकर स्पष्टता जरूरी होगी। हर अविवाहित युवती को स्वतः पात्र नहीं माना जा सकता, इसलिए सरकार एक निश्चित श्रेणी तय करने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही न्यूनतम और अधिकतम आयु सीमा को भी परिभाषित किया जा सकता है, जिससे यह स्पष्ट रहे कि किस आयु वर्ग की युवतियां इस योजना का लाभ ले सकेंगी।
इसी तर्ज पर दिव्यांग महिलाओं और ट्रांसजेंडर महिलाओं के लिए भी अलग से पात्रता मापदंड तैयार किए जाएंगे। इसका मकसद यह है कि योजना का क्रियान्वयन पारदर्शी रहे और किसी तरह की अस्पष्टता के कारण पात्र लोगों को दिक्कत न हो।
विभागों से मांगे जा रहे आंकड़े
महतारी वंदन योजना के प्रस्तावित विस्तार को अमली जामा पहनाने से पहले सरकार जमीनी आंकड़े जुटाने में लगी है। संबंधित विभागों से दिव्यांग महिलाओं और ट्रांसजेंडर महिलाओं से जुड़े आंकड़े मांगे जा रहे हैं, जिनमें उनकी कुल संख्या, आयु वर्ग के अनुसार वितरण और अन्य जरूरी विवरण शामिल हैं। यह कवायद इसलिए जरूरी है क्योंकि इसी आधार पर सरकार यह अंदाजा लगा पाएगी कि नए वर्गों को शामिल करने पर कितनी अतिरिक्त महिलाएं योजना का हिस्सा बनेंगी। महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़
आंकड़ों के संकलन के बाद इनका विश्लेषण करके संभावित नए हितग्राहियों की अनुमानित संख्या तय की जाएगी। इसी संख्या के आधार पर यह आकलन किया जाएगा कि योजना के विस्तार से सरकारी खजाने पर कितना अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। चूंकि यह योजना पहले से ही राज्य के बजट का एक बड़ा हिस्सा खर्च करती है, इसलिए वित्तीय व्यवहार्यता का आकलन बेहद अहम माना जा रहा है।
छूटी हुई महिलाओं को मिलेगा दूसरा मौका
राज्य में ऐसी कई पात्र महिलाएं हैं, जो विभिन्न कारणों से पहले महतारी वंदन योजना के लिए आवेदन नहीं कर पाई थीं—चाहे वह जानकारी के अभाव में हो, दस्तावेजों की कमी के कारण हो, या फिर आवेदन प्रक्रिया के दौरान किसी तकनीकी अड़चन के चलते हो। ऐसी महिलाओं के लिए अब एक और अवसर मिलने की उम्मीद जगी है।
अगर सरकार पोर्टल दोबारा खोलने का फैसला करती है, तो इन महिलाओं को नए सिरे से ऑनलाइन आवेदन करने का मौका मिलेगा। हालांकि यह प्रक्रिया केवल आवेदन जमा करने तक सीमित नहीं रहेगी। इसके साथ दस्तावेजों के सत्यापन और पात्रता की गहन जांच की व्यवस्था भी लागू की जाएगी, ताकि योजना का लाभ केवल वास्तविक और योग्य हितग्राहियों तक ही पहुंचे। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि किसी अपात्र व्यक्ति को गलती से योजना का लाभ न मिल जाए।
हर महीने मिलती है 1000 रुपये महतारी वंदन योजना की सहायता
महतारी वंदन योजना के तहत फिलहाल राज्य की लाखों पात्र महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) प्रणाली के जरिए भेजी जाती है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होती है और पैसा सीधे लाभार्थी तक पहुंचता है।
इस योजना पर राज्य सरकार हर महीने करीब 700 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, जो यह दिखाता है कि यह छत्तीसगढ़ सरकार की सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी कल्याणकारी योजनाओं में से एक है। इतनी बड़ी राशि हर महीने खर्च होने के कारण ही सरकार किसी भी नए विस्तार से पहले सावधानीपूर्वक वित्तीय आकलन करना चाहती है, ताकि योजना दीर्घकाल तक टिकाऊ और प्रभावी बनी रहे।
महतारी वंदन योजना में नए वर्गों को शामिल करने के पीछे की सोच
योजना में दिव्यांग महिलाओं, कुछ श्रेणी की अविवाहित युवतियों और ट्रांसजेंडर महिलाओं को शामिल करने का विचार इस बात का संकेत है कि सरकार सामाजिक सुरक्षा के दायरे को व्यापक बनाना चाहती है। ये तीनों ही वर्ग समाज के ऐसे तबके माने जाते हैं, जिन्हें आर्थिक स्वावलंबन में अक्सर अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। दिव्यांग महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर सीमित रहते हैं, वहीं ट्रांसजेंडर समुदाय को सामाजिक स्वीकृति और आर्थिक अवसरों दोनों में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
छत्तीसगढ़ शासन का आधिकारिक पोर्टल
अगर सरकार इन वर्गों को महतारी वंदन योजना में शामिल करती है, तो यह न केवल आर्थिक सहायता के रूप में मदद पहुंचाएगा, बल्कि इसे एक सामाजिक समावेशन के कदम के रूप में भी देखा जाएगा। हालांकि इसके लिए स्पष्ट नीति और पारदर्शी क्रियान्वयन तंत्र बेहद जरूरी होगा, ताकि योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित न हो।
आगे की प्रक्रिया
विभागीय स्तर पर आंकड़े जुटाने और प्रस्ताव तैयार करने का काम अभी जारी है। इसके पूरा होने के बाद ही महतारी वंदन योजना के विस्तार को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा। इसमें यह भी देखा जाएगा कि नए वर्गों को शामिल करने से योजना के समग्र बजट पर कितना असर पड़ेगा और क्या मौजूदा वित्तीय ढांचे में इस अतिरिक्त भार को समायोजित किया जा सकता है।
फिलहाल सरकार का मुख्य ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि योजना का लाभ वास्तव में पात्र, लेकिन अब तक छूट गई महिलाओं तक पहुंचाया जाए। इसके साथ ही नए वर्गों को शामिल करने की दिशा में उठाए जाने वाले कदम को लेकर भी सतर्कता बरती जा रही है, जिससे योजना का क्रियान्वयन सुचारू रूप से हो सके और किसी तरह की प्रशासनिक या वित्तीय अड़चन सामने न आए।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार पोर्टल दोबारा कब खोलती है, और नए वर्गों को शामिल करने को लेकर कब तक अंतिम नीति सामने आती है। जब तक विभागीय आंकड़े और प्रस्ताव पूरी तरह तैयार नहीं हो जाते, तब तक इस पर अंतिम मुहर लगना मुश्किल दिख रहा है। लेकिन इतना तय है कि सरकार की मंशा इस योजना को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाने की है, जिससे राज्य की अधिक से अधिक जरूरतमंद महिलाएं इसका लाभ उठा सकें।

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