कागज़ों में बन गए गेट, गार्डन और पार्किंग, ज़मीन पर मिला सिर्फ खाली मैदान!
अम्बिकापुर (सरगुजा)। सरकारी कागज़ों में वहां गार्डन महक रहा है, सीसी रोड चमक रही है, भव्य प्रवेश द्वार खड़ा है और पार्किंग शेड भी तैयार है। पर जब कलेक्टर की जांच टीम मौके पर पहुंची, तो उसे इनमें से कुछ भी नहीं मिला। यह कहानी केशवपुर के शासकीय स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम महाविद्यालय की है। यहां जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) की 1 करोड़ 32 लाख 33 हजार रुपये की राशि में बड़े फर्जीवाड़े का आरोप है।
अब अदालत के आदेश के बाद मणिपुर थाने में तत्कालीन जनपद पंचायत अम्बिकापुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) सुरेश्वर नाथ तिवारी समेत 9 नामजदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई है। इनमें एक फर्म भी शामिल है।
एक परिवाद, जिसने खोल दी पूरी फाइल
मामले की जड़ में अम्बिकापुर के वार्ड 21, संजय पार्क निवासी अभय नारायण पाण्डेय हैं। उन्होंने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया। मामला जब अदालत पहुंचा, तो सुनवाई करते हुए न्यायाधीश गुलापन राम यादव ने 8 अक्टूबर 2026 को मणिपुर थाना प्रभारी को स्पष्ट निर्देश दिया। निर्देश था कि तत्काल मामला दर्ज किया जाए और निष्पक्ष विवेचना की जाए।
आदेश के सिर्फ 16 दिन बाद, 24 अक्टूबर 2026 को मणिपुर पुलिस ने अपराध क्रमांक 180/2026 दर्ज कर लिया। इस तरह वह मामला अब पुलिस की जांच के दायरे में आ गया है, जो अब तक फाइलों और शिकायतों में दबा हुआ था।
तीन काम, तीन स्वीकृतियां, कुल 1.32 करोड़
DMF मद से आत्मानंद विद्यालय परिसर में तीन अलग-अलग विकास कार्यों के लिए कुल 1 करोड़ 32 लाख 33 हजार रुपये स्वीकृत हुए थे:- गार्डन का सौंदर्यीकरण और सीसी रोड निर्माण: 33 लाख 24 हजार रुपये- प्रधान पाठक कक्ष, प्रसाधन और बाउंड्रीवॉल निर्माण: 49 लाख 57 हजार रुपये- प्रवेश द्वार (गेट) और पार्किंग शेड निर्माण: 49 लाख 52 हजार रुपये
यानी बच्चों की पढ़ाई और स्कूल की सुविधाओं के नाम पर भारी-भरकम रकम तय हुई थी। आरोप है कि इस रकम के साथ जो हुआ, वह किसी “सुनियोजित खेल” से कम नहीं था।
जेम पोर्टल पर “फर्जी आईडी” का आरोप
शिकायत और प्राप्त विवरण के मुताबिक, प्रक्रिया की शुरुआत में ही गड़बड़ी हुई। आरोप है कि सरकारी खरीद के जेम (GeM) पोर्टल पर फर्जी आईडी तैयार की गई। बिना प्रशासकीय स्वीकृति और बिना नियमानुसार टेंडर या कार्य प्रक्रिया पूरी किए, फर्जी बिल-वाउचर बनाए गए। साथ ही कूटरचित मूल्यांकन प्रतिवेदन (Valuation Report) भी तैयार किया गया।सरल भाषा में आरोप यह है कि पहले कागज़ तैयार हुए, उसके बाद भुगतान हुआ, और काम का नंबर आया ही नहीं।
1 अगस्त 2023: RTGS से गया 48 लाख से ज़्यादा
आरोप के अनुसार, इन्हीं दस्तावेज़ों के आधार पर 1 अगस्त 2023 को मेसर्स स्मृति कंस्ट्रक्शन के पक्ष में 48 लाख 36 हजार 544 रुपये का भुगतान RTGS के जरिए कर दिया गया। यह भुगतान ऐसे काम के नाम पर हुआ, जो जांच में ज़मीन पर मिला ही नहीं।
7 अक्टूबर 2024: जब जांच टीम मौके पर पहुंची
घोटाले की भनक लगते ही जिला प्रशासन हरकत में आया। कलेक्टर द्वारा गठित विशेष जांच दल ने 7 अक्टूबर 2024 को मौके पर पहुंचकर भौतिक सत्यापन किया। नतीजा चौंकाने वाला था। जांच दल को स्वीकृत निर्माण कार्य का नामोनिशान तक नहीं मिला। ज़मीन पर कोई भी कार्य नहीं दिखा।जांच रिपोर्ट में पूरे प्रकरण को पूरी तरह सुनियोजित फर्जीवाड़ा करार दिया गया। यही रिपोर्ट अब इस मामले का सबसे बड़ा आधार मानी जा रही है।
ये हैं नामजद 9
पुलिस ने लोक सेवकों और निजी ठेकेदारों की मिलीभगत मानते हुए इन्हें नामजद किया है:1. सुरेश्वर नाथ तिवारी (तत्कालीन CEO, जनपद पंचायत अम्बिकापुर)2. विवेक प्रताप सिंह राठौर3. उपेन्द्र सिंह सेंगर4. शैलेन्द्र मिश्रा5. राम प्रकाश यादव6. इम्तियाज सिंह7. सुयश अग्रवाल8. अरविंद कुमार अग्रवाल9. मेसर्स स्मृति कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रेक्टर एंड सप्लायर्स (फर्म)

भारतीय दंड संहिता की इन गंभीर धाराओं में केस
– धारा 409: लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात- धारा 420:धोखाधड़ी- धारा 467, 468, 471: दस्तावेज़ों की कूटरचना और फर्जीवाड़ा- धारा 201: साक्ष्य छिपाना- धारा 120-बी: आपराधिक षड्यंत्र- धारा 34: समान आशय
इनमें धारा 409 सबसे संगीन मानी जाती है, क्योंकि यह लोक सेवक द्वारा भरोसे के दुरुपयोग से जुड़ी है। इसके साथ 120-बी जुड़ने का मतलब है कि पुलिस इसे अलग-अलग गलतियों के बजाय मिलीभगत से किया गया संगठित अपराध मान रही है।
आपसी सांठ-गांठ से बंदरबांट” का आरोप
प्रारंभिक अनुसंधान में सामने आया है कि सभी आरोपियों ने आपसी सांठ-गांठ और आपराधिक षड्यंत्र के तहत शासकीय राशि निकाली। उस राशि को निजी स्वार्थ के लिए आपस में बांट लिया गया, जिससे शासन को भारी वित्तीय क्षति हुई। ये बातें पुलिस के प्रारंभिक अनुसंधान पर आधारित हैं। इनकी अंतिम पुष्टि विवेचना और न्यायालयीन प्रक्रिया में होगी।
मणिपुर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर विस्तृत विवेचना शुरू कर दी है। घोटाले से जुड़े अन्य दस्तावेज़ों की पड़ताल हो रही है और इसमें शामिल अन्य लोगों के सुराग भी तलाशे जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि जांच का दायरा बढ़ सकता है। जेम पोर्टल की आईडी, वाउचर, मूल्यांकन रिपोर्ट और RTGS की कड़ियां जोड़ी जाएंगी, तो और नाम सामने आ सकते हैं।
जनता के सवाल
DMF का पैसा खनन प्रभावित इलाकों के विकास के लिए होता है, और इस मामले में उसे स्कूल की सुविधाओं के नाम पर खर्च दिखाया गया। इसलिए कई सवाल उठते हैं:- बिना प्रशासकीय स्वीकृति के भुगतान कैसे हुआ?- भौतिक सत्यापन के बिना राशि किसने और कैसे जारी की?- मामला 2023 का है और जांच दल 2024 में पहुंचा, तो एफआईआर 2026 में क्यों दर्ज हुई?इन सवालों के जवाब अब पुलिस की विवेचना से मिलने की उम्मीद है।
