बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में एक बार फिर साइबर ठगी की वारदात सामने आई है, जिसमें अपराधियों ने बैंक कर्मचारी बनकर एक बुजुर्ग रिटायर्ड शिक्षक को निशाना बनाया। यह साइबर ठगी सरकंडा थाना क्षेत्र के जबड़ापारा इलाके में हुई, जहां 89 वर्षीय सेवानिवृत्त अध्यापक नत्थूराव करनेवार को कॉल कर उनसे मोबाइल में YONO एप्लिकेशन इंस्टॉल करवाया गया और इसी प्रक्रिया के दौरान उनके बैंक खाते की गोपनीय जानकारी हासिल कर ली गई। जानकारी हाथ लगते ही जालसाजों ने इंडियन बैंक की ईदगाह चौक शाखा में मौजूद उनके खाते से 3 लाख 16 हजार 919 रुपए की रकम पलक झपकते ही उड़ा दी। यह घटना एक बार फिर यह उजागर करती है कि किस तरह साइबर ठगी के गिरोह बुजुर्ग और तकनीकी रूप से कम जागरूक नागरिकों को आसान निशाना बना रहे हैं।
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कैसे रची गई साइबर ठगी की पूरी साजिश
पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, गुरुवार शाम लगभग 4 बजकर 30 मिनट पर पीड़ित शिक्षक के मोबाइल फोन पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को बैंक का अधिकारी अथवा कर्मचारी बताया और बड़ी ही सहजता से बातचीत शुरू की। बातचीत के दौरान उसने बताया कि उनके खाते से जुड़ी किसी सेवा को अपडेट करने के लिए YONO एप डाउनलोड करना अनिवार्य है। इसी बहाने से साइबर ठगी की पूरी पटकथा तैयार की गई थी। भरोसे में आकर बुजुर्ग शिक्षक ने कॉलर के निर्देशों का पालन करते हुए एप डाउनलोड करने की प्रक्रिया पूरी की और इस दौरान अनजाने में अपने बैंक खाते से संबंधित संवेदनशील जानकारी साझा कर बैठे। यही एक चूक उनके लिए भारी साबित हुई, क्योंकि इस जानकारी का इस्तेमाल कर ठगों ने तुरंत खाते से बड़ी रकम निकाल ली।
साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930: राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930
मैसेज देखकर उड़े होश, तुरंत पहुंचे बैंक
जैसे ही खाते से रकम कटने का मैसेज मोबाइल पर आया, नत्थूराव करनेवार को इस साइबर ठगी का एहसास हुआ। इतनी बड़ी रकम एक साथ कटने का संदेश देखकर वे स्तब्ध रह गए। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने देर न करते हुए तुरंत संबंधित बैंक शाखा पहुंचकर अपना डेबिट कार्ड ब्लॉक करवाया, ताकि आगे और नुकसान न हो। इसके साथ ही उन्होंने साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों के लिए बनाई गई राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी तत्काल शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित की सजगता के चलते आगे की धनराशि सुरक्षित रह सकी, हालांकि जो रकम पहले ही निकाली जा चुकी थी, उसे लेकर वे परेशान हैं।
पुलिस ने दर्ज की एफआईआर, जांच शुरू
पीड़ित शिक्षक की लिखित शिकायत के आधार पर सरकंडा थाना पुलिस ने अज्ञात मोबाइल नंबर धारकों के विरुद्ध धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। इस साइबर ठगी के मामले में पुलिस अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) खंगालने के साथ-साथ तकनीकी साक्ष्यों की मदद से आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के साइबर ठगी गिरोह अक्सर फर्जी सिम कार्ड और दूसरे राज्यों से संचालित कॉल सेंटरों के जरिए वारदात को अंजाम देते हैं, जिससे उन तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। बावजूद इसके, तकनीकी निगरानी और डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर आरोपियों की पहचान की कोशिशें जारी हैं।
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बिलासपुर में लगातार बढ़ रहे साइबर ठगी के मामले
गौरतलब है कि बिलासपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में साइबर ठगी की घटनाओं में लगातार इजाफा देखा जा रहा है। पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि बैंक अधिकारी बनकर, केवाईसी अपडेट के नाम पर, लॉटरी जीतने का झांसा देकर या फिर फर्जी एप डाउनलोड करवाकर आम नागरिकों को साइबर ठगी का शिकार बनाया जा रहा है। खासतौर पर बुजुर्ग नागरिक, जो डिजिटल बैंकिंग और मोबाइल एप्लिकेशन के इस्तेमाल में उतने सहज नहीं होते, वे साइबर ठगी करने वाले गिरोहों के आसान लक्ष्य बन जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर ठगी की वारदातों में इस्तेमाल होने वाला तरीका लगभग एक जैसा होता है — पहले फोन पर भरोसा जीतना, फिर तकनीकी शब्दजाल का इस्तेमाल कर डराना या लुभाना, और अंत में गोपनीय जानकारी हासिल कर खाता खाली कर देना।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल: cybercrime.gov.in
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह
साइबर ठगी की इस बढ़ती घटनाओं को देखते हुए साइबर सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञ बार-बार आगाह करते रहे हैं कि कोई भी बैंक कभी फोन पर ओटीपी, पिन, सीवीवी या पासवर्ड जैसी जानकारी नहीं मांगता। अगर कोई कॉलर खुद को बैंक अधिकारी बताकर ऐसी जानकारी मांगे, तो उसे तुरंत साइबर ठगी का प्रयास समझकर कॉल काट देना चाहिए। इसके अलावा किसी भी अनजान लिंक या एप को बिना पूरी जांच किए डाउनलोड नहीं करना चाहिए, क्योंकि कई बार ऐसे एप के जरिए ही मोबाइल का रिमोट एक्सेस लेकर साइबर ठगी को अंजाम दिया जाता है। परिवार के बुजुर्ग सदस्यों को भी इस बारे में समय-समय पर जागरूक करना जरूरी है, ताकि वे ऐसी किसी भी साइबर ठगी की कोशिश का शिकार होने से बच सकें।
पीड़ित को न्याय की उम्मीद
फिलहाल पीड़ित रिटायर्ड शिक्षक नत्थूराव करनेवार को उम्मीद है कि पुलिस जल्द ही इस साइबर मामले में शामिल अपराधियों तक पहुंचेगी और उनकी मेहनत की कमाई वापस दिलाई जाएगी। सरकंडा पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है और जल्द ही इस साइबर ठगी के गिरोह का पर्दाफाश करने का प्रयास किया जाएगा। यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे कारगर तरीका है, और किसी भी अनजान कॉल पर बैंकिंग जानकारी साझा करने से पहले सौ बार सोचना जरूरी है।

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